पैरों में सूजन का कारण क्या है?HealthPlanet

Posted on Tue 29th Nov 2022 : 17:05

पैरों में सूजन के कारण

स्वास्थ्य के प्रति अनदेखी करने से कभी-कभी पूरे शरीर में या फिर किसी अंग विशेष में सूजन आ जाती है विशेषकर पैरों में सूजन आना एक आम समस्या है लेकिन यदि ऐसा बार-बार हो तो यह शरीर में छिपी किसी बड़ी बीमारी का संकेत भी हो सकता है। यह शरीर में अत्यधिक पानी एकत्रित होने के कारण होता है और यह हृदय लिवर या किडनी की किसी समस्या का संकेत होता है। जब शरीर में अतिरिक्त पानी या फ्लूइड जमा हो जाता है तो शरीर में सूजन आने लगती है जिसे इडिमा कहा जाता है। जब यह सूजन टखनों, पैरों और टांगों में आती है तो उसे पेरीफेरल इडिमा कहते हैं। कभी-कभी लम्बे समय तक सफर करने या अनुचित आहार-विहार के कारण भी पैरों में हल्का सूजन आ जाना यह कोई बड़ी समस्या नहीं है लेकिन ज्यादा समय तक रहने वाला सूजन गंभीर बीमारी का संकेत होता है।
पैरों में सूजन होना क्या होता है

आयुर्वेद में शरीर में किसी भी अंग में आई सूजन को ‘शोथ’ कहा गया है। शोथ होने पर कफ और वात दोष मुख्य रूप से दूषित होते है। वात एवं कफवर्धक आहार के अत्यधिक सेवन एवं अनुचित जीवनशैली के यह दोष असंतुलित होकर शरीर में जिस जगह अवरूद्ध हो जाते है वहाँ पर शोथ उत्पन्न करते है।

एलोपैथिक उपचार में दी गई औषधियों के कारण ज्यादा मूत्र होने की वजह से सूजन कम होने लगता परंतु इन दवाइयों के सेवन से व्यक्ति को साइड इफेक्टस होने का खतरा रहता है परंतु आयुर्वेदिक उपचार या प्राकृतिक उपचार होने की वजह से सूजन को ठीक करता है और शरीर पर इसके कोई विपरीत प्रभाव यानी साइड इफेक्ट्स नहीं पड़ते। आयुर्वेदिय उपचार केवल सूजन को नहीं बल्कि रोग को बिल्कुल ठीक करके शरीर को स्वस्थ बनाने में मदद करता है।
पैरों में सूजन होने के कारण

पैरों में सूजन होने के और भी बहुत सारे कारण होते हैं, वह हैं-

-पैर में मोच आना।

-दूर तक सैर करना।

-बहुत देर तक पैरों को लटका कर बैठना।

-ज्यादा देर तक खड़े रहना, व्यायाम या फिर खेल-कूद आदि।

-डीप वेन थ्रोम्बोसिस (Deep vein thrombosis (DVT) की समस्या।

-रेनल फेल्योर (Renal failure) के कारण।

-हृदय संबंधित रोग।

–उच्च रक्तचाप की समस्या होने पर।

-महिलाओं में गर्भावस्था के समय।

-कुछ महिलाओं में मासिक धर्म के एक सप्ताह पहले भी पैर में सूजन की समस्या देखी जाती हैं क्योंकि इस दौरान महिलाओं के शरीर में एस्ट्रोजेन (Estrogen) की मात्रा बढ़ जाती है जिसकी वजह से किडनी ज्यादा पानी रोकना शुरू कर देती है।

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